भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर जो गतिरोध बना हुआ है, उसका मुख्य कारण अमेरिका के कृषि एवं डेयरी क्षेत्रों तक अपनी पहुंच चाहते हुए भारत की संवेदनशील कृषि नीति के प्रति भारतीय सरकार का कड़ा रुख है। डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिकी प्रशासन ने भारत से कृषि बाजारों को खोलने, विशेष रूप से मक्का (कॉर्न), सोयाबीन, एथनॉल, और डेयरी उत्पादों के आयात में छूट देने के लिए दबाव बनाया है। भारत ने इन मांगों को अस्वीकार करते हुए कहा है कि यह किसानों के हितों के खिलाफ होगा, क्योंकि भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में करोड़ों छोटे और पारंपरिक खेती करने वाले किसान शामिल हैं जिन्हें अमेरिकी सब्सिडी वाले और बड़े फार्म उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होगा।
इस विवाद के तीन मुख्य मुद्दे हैं:
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भारत के कृषि और डेयरी बाजारों की सुरक्षा: भारत अपनी कृषि और डेयरी उत्पादों को अमेरिकी निर्यातकों से बचाने के लिए ऊंचे टैरिफ लगाए हुए है, जहां तक भारत की मंशा है कि छोटे किसानों की आजीविका सुरक्षित रहे और घरेलू बाजार में स्थिरता बनी रहे।
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जीन-तकनीक से संशोधित (GM) फसलों का आयात: अमेरिका चाहते हैं कि भारत मक्का और अन्य जीन-तकनीक से संशोधित फसलों का आयात शुरू करे, जबकि भारत ने स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी चिंताओं के कारण GM फसलों को अपनी कृषि नीति में शामिल नहीं किया है।
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टैरिफ एवं गैर-टैरिफ बाधाएँ: अमेरिका ने भारत पर उच्चतम कृषि आयात टैरिफ और सख्त गैर-टैरिफ नियमों को हटाने को कहा है, लेकिन भारत ने इन बाधाओं को घरेलू कृषि संरक्षण के लिए आवश्यक बताया है।
हाल ही में, ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर 50% तक का भारी टैरिफ लगाने की घोषणा की, जो अमेरिकी निर्यातों पर दबाव बनाने का उपाय है। इसके जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि भारत किसानों के हितों और कृषि सुरक्षा का कोई समझौता नहीं करेगा, चाहे इसके लिए भारी आर्थिक दाम भी क्यों न चुकाना पड़े।
इस स्थिति का मुख्य कारण है कि भारत के लिए कृषि एक आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का स्तंभ है, जो ग्रामीण आबादी की आजीविका का आधार है। इसलिए भारत कृषि बाजार खोलने को लेकर सजग है, वहीं अमेरिका प्रभावित क्षेत्रों में अधिक पहुंच चाहता है। इस टकराव के कारण पांच दौर की बातचीत के बाद भी कोई समझौता नहीं हो पाया है।
सारांश में, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर विवाद के ये तीन प्रमुख कारण हैं:
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भारतीय कृषि और डेयरी क्षेत्र की सुरक्षा,
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जीन-तकनीक से संशोधित फसलों का आयात रोकना,
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उच्च टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों को लेकर असहमति।
भारत सरकार किसानों के हितों की रक्षा में कड़ी नहीं हटने को तैयार है, जबकि अमेरिका दबाव बढ़ा रहा है, जिससे व्यापार समझौता अटका हुआ है। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच संघर्ष जारी है और भविष्य में बातचीत की संभावना बनी हुई है।
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