उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में एक नया फार्मास्युटिकल पार्क स्थापित किया जा रहा है, जो राज्य के औद्योगिक विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पार्क 1,472.33 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा और इसके लिए 450 करोड़ रुपये की प्रारंभिक धनराशि स्वीकृत की गई है।
परियोजना का उद्देश्य और महत्व
ललितपुर फार्मा पार्क का उद्देश्य भारत को फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। यह पार्क की स्टार्टिंग मटीरियल्स (KSM) और एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) के उत्पादन का केंद्र बनेगा, जिससे दवाओं के निर्माण में देश की निर्भरता कम होगी।
निवेश और रोजगार के अवसर
इस परियोजना के माध्यम से राज्य सरकार को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है। इसके साथ ही, यह पार्क प्रत्यक्ष रूप से 1.5 लाख और अप्रत्यक्ष रूप से 3 लाख रोजगार के अवसर सृजित करेगा।
### आधुनिक सुविधाएं और बुनियादी ढांचा
पार्क में उद्योगों के लिए 94 प्लॉट्स उपलब्ध कराए जाएंगे, जिनका आकार 5 से 50 एकड़ के बीच होगा। इसके अलावा, पार्क में ड्राई पोर्ट, कॉमन फैसिलिटी एरिया, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग, टेस्टिंग और रिसर्च सेंटर, रेजिडेंशियल और कमर्शियल जोन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
### कनेक्टिविटी और स्थानिक लाभ
ललितपुर पार्क की कनेक्टिविटी भी इसकी एक बड़ी विशेषता है। यह MDR 35B सड़क मार्ग से जुड़ा है, और NH 44 तथा NH 539 इसके निकट हैं। रेल मार्ग से यह टीकमगढ़ रेलवे स्टेशन (35 किमी) और ललितपुर रेलवे जंक्शन (50 किमी) से जुड़ा है। हवाई यात्रा के लिए खजुराहो एयरपोर्ट (125 किमी) और लखनऊ एयरपोर्ट (385 किमी) प्रमुख विकल्प हैं।
तकनीकी सहयोग और अनुसंधान
उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPSIDA) और IIT-BHU ने फार्मा पार्क के विकास के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग के तहत, IIT-BHU का फार्मास्युटिकल इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी विभाग (DOPET) तकनीकी सलाह और अनुसंधान में सहायता प्रदान करेगा।
### सरकारी प्रोत्साहन और नीतियां
राज्य सरकार ने फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस नीति, 2023 के तहत निवेशकों को विभिन्न प्रोत्साहन प्रदान किए हैं, जैसे कि स्टांप ड्यूटी में छूट, SGST रिफंड, बिजली शुल्क में छूट, EPF रिइम्बर्समेंट, और अन्य।
ललितपुर में स्थापित हो रहा फार्मास्युटिकल पार्क उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह न केवल राज्य को फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा। सरकार की यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को सशक्त बनाएगी और देश को वैश्विक फार्मा हब बनने की दिशा में अग्रसर करेगी।